Monday, September 10, 2007

नाम कमाने के चक्कर में मत पडना

बालक ने अपने शिक्षक को बताया
' मैं बड़ा होकर करूंगा समाज सेवा'
शिक्षक ने कहा
'तब तो तुम अच्छी तरह पढ़-लिख लो
बडे आदमी बन जाओ
अपने नाम के आगे उपाधियां लगाओ
और कहीं से पुरस्कारों की जुगाड़ लगाओ
फिर भले ही दिखाने के लिए करना समाज सेवा
होगी तुम्हारी इज्जत चारों तरफ
बग़ैर इनके चाहे कितनी भी कर लो
कोई नहीं होगा नाम लेवा'

बालक ने अपने पिता से कहा
पहले तो वह चकराये फिर बोले
'जो राह बताई है तुम्हारे शिक्षक ने
उसी राह पर चलना
पहले अपना घर भरना सीख लो
आजकल मीडिया बहुत पावरफुल है
बाँट देना कुछ कंबल और अनाज
फोटो खिंचवा कर टीवी और अखबार में
विज्ञापन के रुप में छपवा देना
इससे पहले उपाधियों और पुरस्कार का
अपनी नेम प्लेट पर अंबार लगा लेना
फिर तुम्हें प्रसिद्धि दिलाएगी समाज सेवा

बालक का मन फिर गया
उसने सोचा
पहले उपाधियों और पुरस्कारों के
अपने लिए ढ़ेर लगा लूं
शायद तभी होगी समाज सेवा'
फिर उसने अपने दादाजी से पूछा
तो उन्होने कहा
'तुम अपने मन की बात किसी से न कहना
तेरे निच्छ्ल मन को वह नहीं
कभी समझ पाएंगे
अभी जमकर पढ़-लिखना
पर अपने मन में समाज के लिए
सच्ची हमदर्दी रखना
शक्ति का संचय तो करना क्योंकि
वही समाज सेवा के काम आयेगी
पर नाम कमाने के चक्कर में मत पडना
वरना वह झूठी हो जायेगी

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