Monday, September 10, 2007

मेकअप की माया

निर्देशक ने कहा हीरोइन से
'अपना मुहँ धोकर आओ
क्योंकि यह रोल ही एसा है
जिसमें तुम्हें लगना है
एक दम सामान्य नारी'

हीरोइन को नागवार गुजरा यह विचार
वह बोली-
'क्या बेवकूफों वाली बात करते हो
लगता है मेरी छबि खराब करनी है
तुम मुझसे वैसे ही जलते हो
अगर मुहँ धोकर आयी तो
पूरा मेकअप खराब हो जाएगा
मेरा चेहरा अपने घर पर
काम करने वाली बाई जैसा हो जाएगा
तुम डाइरेक्टर हो या अनाडी'
डाइरेक्टर ने शांति से जवाब दिया
'यह घर की बाई का ही रोल है
सुन्दर नहीं है पर उसके मीठे बोल हैं
यह कोई मामूली रोल नहीं है
तुम्हारे लिए चुनौती है भारी'

हीरोइन ने कहा
'मीठे बोल तो मेरे भी हैं
और न भी हैं तो डबिंग में
दूसरे उधार आवाज ले सकते हैं
पर लोग तो मरते है चेहरे पर
उसी पर आहें भरते हैं
मुझे मंजूर नही है यह चुनौती
चाहे कितनी भी दो रकम भारी'

डाइरेक्टर ने कहा
'कोयल काली होती है
पर अपनी मधुर वाणी के कारण ही
लगती है प्यारी
आप अच्छा अभिनय करेंगी तो
अपने आप फिल्म हिट हो जायेगी हमारी'

हीरोइन नहीं मानी
और गयी निर्माता के पास
और कहानी बयान की सारी
उसे समझा बहुत कुछ
वह भी आग बबूला हुआ और
डाइरेक्टर से बोला
'आजकल गया है समय बदल
घर में काम करने वालीं महिलाएं भीं
करती हैं हीरोइन जैसा मेकअप
तुम ख्वाबों में मत रहो
देखो पूरे जमाने का गेटअप
हीरोइन का मत खराब करो मेकअप
इससे तो फिल्म पिट जायेगी हमारी'

डाइरेक्टर मान गया और अकेले में बोला
'गरीबी का दर्द यह अमीर क्या जानेंगे
उन्हें झोंपडी में महल जैसा सुख लेकर
देख कर उसे भी उजाडेंगे
जिनकी आंखों में दौलत और शौहरत का
मेकअप गढा हो
वह गरीब को भी वैसा ही मानेंगे
माया का है सच पर पहरा भारी'
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