Friday, August 24, 2012

मेहनत और अक्ल का इस्तेमाल-हिंदी कविता (mehanat aur akla ka istemal-hindi kavita)


अपने सपनों का पूरा होने का बोझ
दूसरों के कंधों पर वह टिकाते हैं,
पूरे होने पर अपनी कामयाबी पर
अपनी ही ताकत दिखाते हैं।
कहें दीपक बापू
मेहनत और अक्ल का
इस्तेमाल करने का सलीका नहीं जिनको
वही दूसरों को अपनी जरूरतों के वास्ते
पहले सर्वशक्तिमान से याचना
फिर पूरी होने पर
ज़माने के सामने इतराना सिखाते हैं।
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लेखक एवं कवि-दीपक राज कुकरेजा
ग्वालियर मध्य प्रदेश
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://dpkraj.blgospot.com

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Thursday, August 16, 2012

साहूकार से बने लाचार-हिंदी कविता (sahukar se bane lachar-hindi kavita-hindi poem)


सेवा का व्रत उन्होंने उठाया है,
मेवा में पद मिलेगा
किसी ने उनको सुझाया है।
गरीबों की मदद
मजदूरों को मेहनताना
और बीमार को इलाज दिलाने के लिये
वह समाज सेवा करने में जुट गये है,
रहने के लिये महल
बैठने के लिये कुर्सी
उड़ने क्रे लिये विमान
उनकी पहली जरूरत बन गये है
लाचार तक पहुंचने के लिये
बन गयी उनकी पहली जरूरत
कई साहुकार बन गये मदद पाने के लिये लाचार
सेवक बने स्वामियों की मदद में
उनके खजाने लुट गये हैं।
.............................................
लेखक एवं कवि- दीपक राज कुकरेजा,‘‘भारतदीप’’,

ग्वालियर, मध्यप्रदेश


कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
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Monday, August 13, 2012

जिंदगी में मजे कुछ यूं लिये-हिन्दी कविता (aindagi ke majre hamane yoon liye-hindi kavita or poem)

चंद पल की खुशी की खातिर
हमने जिंदगी के कई साल बरबाद किये,
जब पढ़ते हैं हम अपनी कहानी
तब पता लगता है कि
अमृत से ज्यादा जहर के प्याले पिये।
कहें दीपक बापू
जुबान से निकले अपने बहुत से बोल
बाहर आते ही जमीन पर गिरते देखे
खामोशी में हम खुशी से जिये,
बहुत से दृश्यों में आंखों फोड़ी
शोर सुनकर कान भी बहरे किये,
मगर मजे से रहे तभी
जब लोग दौड़े सुख के वहम में दुखों की तरफ
हम खड़े रहे बांधे हाथ पीछे किये।
........................................
दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’ग्वालियर
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