Monday, August 6, 2007

माया और मय के खेल में सिद्ध भी फेल हो जाएँ

शादी-ब्याह में लोग
दूल्हा-दुल्हन की जोडी को
राम-सिया जैसी बताएं
पर उनके बारातियों जैसी
मर्यादा नहीं निभाएं
शराब पीकर करते हैं
भरे बाजार करते हैं डांस
सड़क पर जाम लगाएं

आत्मा के मिलन का तो नाम है
लगती है नीलामी दूल्हे की
मांग होती है
टीवी, फ्रिज, मोटर साइकिल
और गैस चूल्हे की
राजा दशरथ जैसे नहीं है
पर मांगें ऎसी कि
बडे-बडे अमीर भी शरामाएं

मर्यादा, संस्कार और कुल की
बातें होती हैं बड़ी-बड़ी
पर लेनदेन की बात पर
सब अपनी औकात बताएं

कहैं दीपक बापू
ज्यों-ज्यों चलते हैं धर्म की राह
त्यों-त्यों अधर्म सामने आता है
सिद्धांतों और आदर्शों के झंडे तले ही
पाखण्ड सरेआम रचा जाता है
शराब के नशे में अमर्यादित होकर
करते हैं मर्यादा की बात
शादी के सौदे में लाखों का लेनदेन कर
करते हैं भगवान् की मर्जी बात
माया और मय का खेल ही ऐसा कि
बडे-बडे सिद्ध भी फेल हो जाएँ
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