नया ज़माने में मौत भी बिकती, बदले में
विज्ञापन लाती है।
‘दीपकबापू’ मस्ती से देख पर्दा, जहां खबरें धन बरसाती हैं।।
-------------------
यहां लाश की पहचान है धर्म, कातिल भी जात
वाला होता है।
‘दीपकबापू’ जिंदा बुतों के खेल में, हर दिल घात वाला होता है।।
---------------------
कतरा कतरा कचड़ा बना पहाड़, तू उठ खड़ा हो
उसे झाड़।
‘दीपकबापू’ बीमार बनने से पहले, उसका कलेजा तू फाड़।।
-------------
कोई मांस खाये या घास चर जाये, अक्लमंद परेशान
क्यों हैं।
दीपकबापू देव असुर की बस्ती यहां, झगड़े से हैरान
क्यों हैं।।
---------------
मुफ्त की रोटी खाने वाले इंसान, शांत वातावरण से
ऊब जाते हैं।
‘दीपकबापू’ बाग में लगाकर आग,माली मन बहलाने में डूब जाते हैं।।
-----------------
आईना चेहरे का सच दिखाता, टूटा तो पांव
में चुभ जायेगा।
‘दीपकबापू’ नीयत से न खेलो, बढ़िया सोच से शुभ आयेगा।।
-----------------
शत्रू मारते वीर सामने से, मित्र पीठ पीछे
से झाड़े जाते हैं।
दीपकबापू फूल तोड़ते उंगली से, कांटे नीचे से
फाड़े जाते हैं।।
--------------
कर्मफल से घी
मिल जाये, वरना कोई भूखा कोई खाये रूखा।
दीपकबापू कब हंसें या रोयें, कहीं आनंद शब्द
बहे कहीं सूखा।।
-------------
दिन में आतंक का डर दिखायें, रात में मित्रता
उससे निभायें।
दीपकबापू विकास के झंडाबरदार, विनाश का पाठ भी
सिखायें।।
------------
नया ज़माने में मौत भी बिकती, बदले में
विज्ञापन लाती है।
‘दीपकबापू’ मस्ती से देख पर्दा, जहां खबरें धन बरसाती हैं।।
-------------------
यहां लाश की पहचान है धर्म, कातिल भी जात
वाला होता है।
‘दीपकबापू’ जिंदा बुतों के खेल में, हर दिल घात वाला होता है।।
---------------------
कतरा कतरा कचड़ा बना पहाड़, तू उठ खड़ा हो
उसे झाड़।
‘दीपकबापू’ बीमार बनने से पहले, उसका कलेजा तू फाड़।।
-------------
लेखक एवं संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’
लश्कर, ग्वालियर (मध्य प्रदेश)
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://dpkraj.blgospot.com