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Saturday, February 28, 2009

नहीं बनी ऐसी कोई तराजू-हास्य व्यंग्य कविताएँ (nahin bani esi tarazu-hindi hasya vyangya kavitaen)

उनके कान खुले हैं
पर सुनते हैं कि नहीं कैसे बताएं
क्योंकि उनको सुनाया कई बार है दर्द अपना
पर कभी ऐसा नहीं हुआ कि वह कोई दवा लाएं
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इश्क तो असल अब वही है
जिसके नाम पर कोई उत्पाद
बाज़ार में बिकता है
औरत हो या मर्द
असल में जज्बातों खरीददार होता है बाज़ार में
भले ही माशूक और आशिक के तौर पर दिखता है
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शब्द बिके नहीं बाज़ार में
तो पढ़े भी नहीं जाते
बिकने लायक लिखें तो
समझने लायक नहीं रह जाते
शब्दों के सौदागरों बनते हैं हमदर्द
पर दिल में उनके जज़्बात कभी
पहुँच नहीं पाते
नहीं बनी कोई ऐसी तराजू
जिसमें शब्दों को तौल पाते
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Thursday, February 5, 2009

पसीना और प्रबंध-तीन व्यंग्य कवितायें

प्रबंध का मतलब उनको केवल
इतना ही समझ में आता है।
परिश्रमी के शरीर से निकले
पसीने का अमृत बना दें
अपने मालिक के लिये
बदले में डालें उस पर विष भरी दृष्टि
और मुफ्त में उसके काम पर गरियायें
हालांकि अवसर आने पर
पसीने का उचित दाम का
नारा लगाना भी उनको खूब आता है।
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इस देश में कुशल प्रबंधक
उसे ही कहा जाता है
जो मालिक की नजर में चढ़ जाता है
दूसरे के पसीने से सींचे हुए फूलों को
जो न्यौछावर कर दे
अपने मालिक के लिये
वही तरक्की की राह पाता है।
पसीने की बूंदों को भले ही
अमृत कहते हों सभी लोग
पर कुशल प्रबंधक वही कहलाता
जो उसमें शोषण का विष मिलाता है।

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पसीने का मूल्य
पूरी तरह नहीं चुकाओ
तभी कुशल प्रबंधक कहलाओगे
कुचलोगे नहीं जब तक किसी निरीह को
तब तक वीर नहीं कहलाओगे।
जमाने का उसूल है
अच्छा है या बुरा
करता है जीतने वालों को सलाम
पद दिल भी कोई चीज है
अपने ईमान से भटके तो
जीत कर भी पछताओगे।
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Wednesday, September 26, 2007

बाजार और प्रचार-हिन्दी हास्य कविता

उपभोक्ता और निर्माता की
मर्जी पर नहीं चलता बाजार
करता है काम एक तंत्र
जिसे कहते हैं प्रचार
सामान खरीदने वाले
कही रेडियो पर सुना हो
कही टीवी पर देखा को
कही पत्र-पत्रिका में पढा हो तब
बनाते अपने विचार का आधार
कभी कौन बनेगा करोड़पति
कभी इंडियन आइडियल
तो कभी चाहिए क्रिकेट का हीरो
उत्पाद बेचने के लिए
आजकल जरूरी है यह सब
नहीं तो सिमट जाता है जीरो
पर पूरा व्यापार

कहै दीपक बापू
आदमी की देह से ज्यादा
उसकी अक्ल पर काबू पाने के लिए
चल रही है विज्ञापन की जंग
जिसमें पैसे के अलावा कोई
किसी का साथी नही
कोई किसी के संग
साथ अपने अक्ल लेकर जाओ बाजार
ठगी से बच नही सकते
सस्ती चीज कही से ले नहीं सकते
किसी चीज की गारंटी भी नहीं उपचार
किसी चीज को खरीद कर ठग जाओ
तो भूल जाओ
मत करो पछतावे का विचार
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