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Monday, April 25, 2011

विशिष्ट लोगों के लिये अलग जेल-हिन्दी हास्य कविता (jail for V.I.P; parson-hindi comic satire poem

विशिष्ट लोगों के जेल जाने की
खबरों से घबड़ाये समाजसेवक ने
अपने चेले को बुलाकर कहा
‘‘जल्दी अपने समर्थकों की आमसभा बुलाओ
सभी सोए कार्यकताओं को हिलाओ डुलाओ,
हम व्ही.आई.पी. लोगों के लिये
अलग जेल बनाने की मांग करेंगे,
चल रहा है भ्रष्टाचार का बुरा समय
कहीं हम भी लगा आरोप तो
जेल में कभी अपने पांव धरेंगे,
सारी जिंदगी समाज सेवा की,
किसी ने दी कमीशन तो हमने ली,
पर इसे पता नहीं क्यों भ्रष्टाचार कहते हैं,
मगर लोग भी प्रचार की धारा में बहते हैं,
इसलिये अच्छा है पहले ही व्ही.आई.पी. जेल बन जाये
ताकि अगर हम फंसे तो
वहां घर और जेल का अंतर न नज़र न आये।
सुनकर चेला बोला
‘‘महाराज,
करना था पहले यह काम,
अब तो हो गये आप बदनाम,
जब आपकी बात सुनी जाती थी,
तब आपको बस चंदा और कमीशन
बटोरने की बात ही याद आती थी,
उस समय अपनी पहुंच का उपयोग कर
विशिष्ट लोगों की जेल बनवाते,
तब आप भी तर जाते,
उस समय विशिष्ट होकर
आम लोगों को समझा था कीड़ा,
जब जेल में जायेंगे तब दिख जायेगी उसकी पीड़ा,
समय आपके हाथ से निकल गया है
कहा भी जाता है
अब क्या होत पछताये,
जब चिड़िया खेत चुग जाये’।’’
कवि, लेखक और संपादक-दीपक "भारतदीप" 
poet,writter and editor-Deepak "BharatDeep"
http://rajlekh-hindi.blogspot.com



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Wednesday, September 26, 2007

इंडियन आइडियल-हास्य कविता

लड़के ने दिया लडकी को
'आई लव यू' का प्रपोजल
लडकी ने 'सोचूँगी पर मेरी पसंद है
कि इंडियन आइडियल जैसा कोई'
कहकर लगा दिया डिस्पोजल
वह खुश हो गया
और हर रोज उसकी राह में खडा होकर
नित नए रचता स्वांग
जब वह निकलती वहाँ से
फिल्मी गाने ऐसे गाता
जैसे पी रखी हो भांग
वह उसे मुस्कराकर देखती और निकल जाती
वह खुश होता हर पल
कई दिन तक चला यह नाटक
पर अभी तक मंजूर
नहीं हुआ था उसका प्रपोजल

उस दिन लडकी उसके पास से गुजरी
और जोर से बोली
'बंद करो यह फिल्मी गाने
अब नहीं रह गए मेरे लिए इसके मायने
अब मेरी पसंद है
ट्वंटी ओवर में सिक्स सिक्सर
लगाने वाले जैसा आइडियल'
लड़का हक्का बक्का खडा रहा
ओपनिंग होने से पहले ही
उसके प्यार का डि स्पोजल
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