Friday, June 5, 2009

वफा और भरोसे की कद्र कौन करेगा-हिंदी शायरी (vafa aur bharose ki kadra-hindi shayri)


सभी इंसान
वादा कर निभाने लगे
तो भरोसे की कद्र कौन करेगा।
सभी साथ निभाने लगे
तो वफा की कद्र कौन करेगा।
सभी मुस्करायेंगे खुशियों में
तो गमों के गीतों में लफ्ज कौन भरेगा।
दुनियां में फरिश्तों की बसती होने का
एक ख्वाब है
अगर सच हो गया
तो सर्वशक्तिमान की इबातद कौन करेगा।
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भरोसा और वफा
बाजार में दाम देकर मिल जाती है
हर इंसान सौदागर है यहां
सच कहने में शर्म क्यों आती है।
खरीदता है कोई
तो वफा और भरोसे के साथ बिक जाना
पर जब खरीददार होकर
जाओ बाजार
वफा और भरोसे समेत
इंसान मिल जायेगा
यह उम्मीद छोड़कर जाना
अपने अंदर ही ईमान हो
उस पर जरूर यकीन करना
पर दूसरे के दिल की नीयत
दिख जाये सामने
ऐसी तरकीब कहीं नहीं मिल पाती है।

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