Sunday, July 22, 2007

बच गया हेरी पॉटर

बच गया हेरी पॉटर
लोग जश्न मनाते हुए
किताब खरीदने के लिए
दुकानों पर लाईन में खडे हैं
अपनी हकीकतों से ऊबे लोग
तकलीफों से जूझते हुए
किताब से उपजे पहाड़ पर खडे हैं

किताबें पढना अच्छी बात है
पर उसके कल्पित पात्रो में
स्नेह बिखेरना इस बात
को साबित करता है कि
असली जीवन में
लोगों को नायक नहीं दिखते
सब छद्म रुप धरे हैं
अभिनय, जनहित और
धर्म का कम करते बहुत लोग
स्तुति और झूठी प्रशंसा से
भरती होगी भले झोली उनकी
पर वह जनमानस के
नायक नहीं दिखते
इसलिये नहीं पिलाते एक घूँट भी
जबकि लोगों के हृदय में
प्रेम और स्नेह से लबालब
घडे पडे हैं

कहैं दीपक बापू
हेरी पॉटर के जिन्दा
रहने पर इतने लोगों ने
मनाया जश्न
अपने के खुश होने पर भी
कितने लोग गदगद होते हैं
उठ रहा है प्रश्न
कल्पित पात्र के लिए
दीवानगी है इतनी
ज़िन्दगी की सच्ची से
भागने की चाह है जितनी
राम, कृष्ण और हनुमान के
बारे में पढ़ाया होता
तो असली नायकों का भान होता
खाली दिमाग में हेरी पॉटर
जैसे कल्पित पात्र इसलिये चढे हैं
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