बिछडे साथियों का पता
किससे पूछें
सभी ढूंढ रहे हैं
अपने यार जो खो गए.
मगर फिर भी पूछते हैं
क्योंकि बात से बात निकलते ही
वही हमारे यार हो गये.
हर आदमी का दिल कहार नहीं बन सकता
जो यादों की डोली लाद कर चलता रहे
बिछडों की याद में हाथ मलता रहे
हमदर्दी लेकर दर्द बाटने वाले
जो लोग मिले, वही दिलदार हो गए..
--------------------------------
यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिकालेखक संपादक-दीपक भारतदीप