Thursday, February 4, 2016

जिंदगी का हिसाब-हिन्दी कविता(Zindagi ka Hisab-Hindi Kavita)


इतनी बड़ी जिंदगी
हर पल का हिसाब
किस बहीखाते में लिखते।
दो भुजा दो पांव
एक मुख  हमारे साथ
कहां कहां दिखते।
कहें दीपकबापू
अपने सीने में
पल रहा दर्द
किसके कान में डालकर
इलाज की चाह रखते
यहां  ऊंची   छवि के
लोग भी सस्ते में बिकते।
...................
लेखक एवं संपादक-दीपक राज कुकरेजा भारतदीप
लश्करग्वालियर (मध्य प्रदेश)
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://dpkraj.blgospot.com


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