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Thursday 12 November 2009

गड़े मुर्दे ताजा हो जाते-हिन्दी क्षणिकाएं (murde taza ho jate-hindi short poem)

गड़े मुर्दे उखड़ कर भी
इसलिये ताजा हो जाते हैं।
क्योंकि जिसे मुद्दे पर
चला चर्चा का दौर एक बार
फिर वह कभी मर नहीं पाते हैं।
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नायकत्व का आकर्षण इतना
कि लोग मरों की राख से
अपना चेहरा सजाते।
एक नारा खोजकर
अपनी जुबान से वाद की तरह बजाते।
दिखावे की जिंदगी जीने की आदत
इस कदर हो गयी लोगों में
अपनी ही सच से मुंह स्वयं ही मुंह छिपाते।

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कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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