Tuesday, March 24, 2015

खिलौनो का खिलवाड़-हिन्दी कविता(khilono ka khilwad-hindi poem)




अब पुराने मकान
नयी इमारत में
अपना रूप बदल रहे हैं।

धरती से निकली गैस
आकाश में करती छेद
सूरज की आग से गर्माते शहर
अपना रूप बदल रहे हैं।

कहें दीपक बापू इंसानों पर
पत्थर और लोहे के
रंगबिरंगे टुकड़ों से
खेलने का नशा छाया
दिल बहलाने वाले खिलौने
खिलवाड़ करने के लिये
अपना रूप बदल रहे हैं।
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लेखक एवं संपादक-दीपक राज कुकरेजा भारतदीप
लश्कर, ग्वालियर (मध्य प्रदेश)
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://dpkraj.blgospot.com

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Wednesday, March 18, 2015

आधुनिक वीर-हिन्दी व्यंग्य कवितायें(adhunik veer-hindi satire poem's)



सेवक बनकर आते

बड़े घर पर कर कब्जा

स्वामी जैसा रखते अहंकार।



कहें दीपक बापू आज के वीर

अपनी आवाज के शोर

 बिना धनुष बाण करते टंकार।।

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बातें बड़ी करने वाले

सभी जगह मिल जाते

काम का समय आये

अपनी जगह से हिल जाते हैं।



कहें दीपक बापू परिश्रम की

प्रशंसा करता ज़माना

मगर मुफ्त के माल से

सभी के चेहरे खिल जाते हैं।
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लेखक एवं संपादक-दीपक राज कुकरेजा भारतदीप
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Thursday, March 5, 2015

ज़माने से कब तक छिपाओगे-हिन्दी कविता(zamane se kab tak chhipaoge-hindi kavita)



कपड़े साबुन से धो लोगे

मगर नीयत के काले दाग

ज़माने से कब तक छिपाओगे।



अपना दर्द भुला दोगे

मगर जिस अपने ही

कसूर से खाये जख्म

ज़माने से कब तक छिपाओगे।



कहें दीपक बापू निर्भयता की

बातें करते हो

अपने कारनामों का

भय तुम्हारे मन दिल में है

ज़माने से कम तक छिपाओगे।
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Sunday, February 22, 2015

धुऐं में मद और दर्द उड़ाते-हिन्दी कविता(dhuen mein mad aur dard udate-hindi poem)




धन का मद सिगरेट
निर्धनता का दर्द बीड़ी के
धूऐं में लोग यूं ही उड़ाते हैं।


मिटते नहीं मस्तिष्क के तनाव
धूऐं के साथ
फिर इंसान की तरफ
मुड़ आते हैं।

कहें दीपक बापू ताजी हवा में
सांस लेना भूल गया ज़माना,
ख्वाहिशों की आग में
जल रहा अब भी परवाना,
स्वर्ग की चाहत में
आकाश में उड़ते लोग
गिरते जमीन पर
नरक से जुड़ जाते हैं।
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Tuesday, February 10, 2015

एक चेहरे के पीछे भीड़-हिन्दी कविता(ek chehare ke peechhe bheed-hindi poem)



एक चेहरा आगे

दिखता है

पीछे नरमुंडों की

भीड़ चली आती है।



एक चरित्र के पीछे छिपे

बहुत से लोगों की

नीयत की पहचान

भला किसे हो पाती है।



कहें दीपक बापू खूबसूरत मुखौटों पर

ज़माना फिदा हो जाता है,

सपनों की मस्ती में खो जाता है,

काले बाज़ार के सौदागर

अपने खेल के लिये

इंसानों के रूप में मुखौटे

बाज़ार में सजा लेते हैं

दिखते हैं वह लोगों के

भले करने के लिये तत्पर

यह अलग बात है

वफा आकाओं के पास

हमेशा गिरवी नज़र आती है।
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Monday, February 2, 2015

खंबे पर कभी रौशनी कभी अंधेरा-हिन्दी कविता(khambe par kabhi roshni kabhi andhera-hindi poem)



सड़क पर खड़ा
बिजली क   खंबा
कभी बल्ब की रौशनी से
राहगीरों का बनता सहारा
कभी स्वयं ही अंधेरे में
डूब जाता है।

लगता है कभी
रौशनी के लिये हुआ दीवाना
कभी जैसे उससे ऊब जाता है।

कहें दीपक बापू नरमुंडों के जंगल में
जिसके हाथ में प्रबंध की
बागडोर होती
चतुर कहलाता है,
शिकायतकर्ता को
मूर्ख बताता है,
कोई कोई ज्ञानी भी है
जो खंबे की जिंदगी की
पहेली बूझ जाता है।
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Friday, January 23, 2015

बहार के लिये तरसायेंगे-बसंत पंचमी पर हिन्दी कविता(bahaar ke liye tarsayeng-basant panchami par hindi poem)



बसंत में भी वह
बहार के लिये
ज़माने को तरसायेंगे।

कर ली दुनियां मुट्ठी में
फिर भी बैचेन हैं
यह सोचकर कि
बहती प्राकृतिक हवा पर
कब नियंत्रण पायेंगे।

कहें दीपक बापू उनकी जुबां से
खूबसूरत शब्द
बहते चले आते ,
हर बार कोई
नया वादा साथ लातें,
रोज का यह चलन हो गया है
हम भी हर बार ताली बजायेंगे।
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Wednesday, January 14, 2015

आकाश के फरिश्तों के नाम पर-हिन्दी कविता(akash ke farostone ke naam par-hindi poem)



आदर्श चालचलन के

कायदे ज़माने को

सर्वशक्तिमान के दलाल

चालाकी से समझाते हैं।





आकाश में फरिश्तों के नाम पर

जो जुटा रहे दो जून की रोटी

ताकत दिखाने के लिये

चेलों का जमघट लगाते हैं।



कहें दीपक बापू तर्क की बात

किसी से करना बेकार है

जिनकी खिचड़ी बन रही

प्रचार की आग पर

चमकने के लिये

बकवादी भी बन जाते हैं।
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Sunday, January 4, 2015

विरोधी की सेवा कर चुके व्यक्ति पर नज़र रखना चाहिये-कौटिल्य के अर्थशास्त्र के आधार पर चिंत्तन लेख(A Hindu hindi article based on kautilya economics)





            पोरंबदर के जलक्षेत्र में भारतीय समुद्री रक्षकों ने एक नाव को रोकने का प्रयास किया तो उसमें बैठे सवारों ने आत्मघाती कदम उठाते हुए अपना ही जलयान उड़ा दिया। कहा जा रहा है कि यह घटना पड़ौसी देश का भारत के विरुद्ध छद्मयुद्ध के रूप में आतंकवादी गतिविधियां चलाने का एक भाग थी।  अभी इस घटना की जांच चल ही रही है पर कुछ भारतीय पत्रकारों ने अपनी ही सेना पर शंका जाहिर करते हुए इस नाव पर तस्करों या मछुआरों के सवार होने और उनके  मारे जाने की बात कही जा रही है। पड़ौसी देश तो पहले ही नहीं मान रहा था कि उसने कोई कोई आतंकी नाव भेजी है पर कुछ भारतीय बुद्धिमानों भी एक तरह से उसकी हां में हां मिलाकर विश्व जनमानस में संदेह फैला दिया।  एक बुद्धिमान तो इतना आगे बढ़ गया कि उसने कहा कि कहीं इस पर मछुआरे हुए तो पड़ौसी देश भी हमारे ही मछुआरों पर हमला कर सकता है।  उसके बयान के 12 घंटे बाद ही पड़ौसी देश ने दो भारतीय नावें पकड़ ली जिसमें 24 मछुआरे शामिल थे।  ऐसे में यह सवाल किसी के मन में आ सकता है कि क्या उस बुद्धिमान ने इस तरह का संदेश कहीं पड़ौसी देश तक तो नहीं पहुंचाया कि वह इस तरह बदले की कार्यवाही करे।  हम उस बुद्धिमान पर आक्षेप नहीं कर रहे पर कभी कभी यह लगता है कि बौद्धिक क्षेत्र में अनेक लोग ऐसे हैं जो अपने ही देश के विरुद्ध सक्रिय दिखते हैं।

कौटिल्य का अर्थशास्त्र में कहा गया है कि
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अकारणादेव हि कारणद्वा व एव कश्वित्पुरुषोऽरिसेवी।
निजश्वविशिलष्टउपेतशस्त्र आयाति यस्तस्य गर्ति प्रपश्येत्।।
            हिन्दी में भावार्थ-अकारण या किसी कारण से जो शत्रु की सेवा कर चुका हो अगर वह फिर से वापस आकर अपने साथ मिले तो उस नज़र रखना ही चाहिये।

            हमारे देश में लोकतंत्र है। इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का देश की प्रतिष्ठा धूल में मिलाने के लिये में उसका उपयोग किया जाये। निष्पक्ष दिखने की ख्वाहिश भी इस तरह के समाचारों पर आपत्तियां उठाने की प्रेरक हो सकती है पर इससे देश की सेना के मनोबल पर पड़ सकता है इस पर ध्यान देना चाहिये।  सबसे बड़ी बात जो बुद्धिमान जलीय क्षेत्र में हुई इस घटना पर जिस तरह विश्लेषण कर रहे हैं उससे यह प्रश्न उठता है कि उनके पास सैन्य विषयों का अनुभव कितना है? प्रथ्वी और जल क्षेत्र में अंतर होता है। जल और थल सेना के काम करने के तरीके में भी अंतर होता है। प्रथ्वी के नियम जल क्षेत्र में नहीं चलतें। हमारे देश के बुद्धिमान इस घटना पर ऐसे बोल रहे हैं जैसे जमीन पर यह सब हुआ है।
            बहरहाल ऐसे लोग पर अन्य बुद्धिमान लोगों को नज़र रखना चाहिये।  हमारी जलसेना ने पहली बार आतंकवादी के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही की है।  ऐसा माना जाता है कि भारत में समुद्री क्षेत्र से ही आतंकवादियों के अस्त्र शस्त्र और देश के युवाओं को तबाह करने के लिये मादक पदार्थ आते हैं।  इसलिये कहीं इस तरह के प्रचार से भारतीय जलसेना का मनोबल गिराने या उत्साहवर्द्धक सक्रियता की जगह भयवश निष्क्रियता में लगाने का प्रयास तो नहीं हो रहा-यह देखते रहना चाहिये।

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