Thursday, January 25, 2018

चोर बन गये साहुकार घर के बाहर पहरेदार खड़े हैं-दीपकबापूवाणी (Chor Ban Gaye sahukar Ghar ka bahar khade hain-DeepakBapuWani)

कत्ल की कहानी सनसनी कहलाती,
इश्क से माशुका आशिक बहलाती।
दीपकबापू रुपहले पर्दे सबकी आंख
सौदागरों के मतलब सहलाती।।
---
लोकतंत्र में मतलबपरस्त
छवि चमकाने में लगे।
लालची भी धर्मात्मा बनकर
सेवा के लिये धमकाने में लगे।
-----
चोर बन गये साहुकार
घर के बाहर पहरेदार खड़े हैं।
‘दीपकबापू’ पतित चरित्र के व्यक्ति
अखबार के विज्ञापन में बड़े हैं।
-----
कभी विनाश कांड देखकर
इतना जोर से मत रोईये।
रात के अंधेरे में विकास रहता
आप मुंह पर चादर ढंककर सोईये।।
----
सड़क पर होते वादे बांटते,
तख्त पर बैठे प्यादे छांटते।
‘दीपकबापू’ मुखौटों की जाने चाल
अपने आकाओं को नहीं डांटते।
----
देशी बोतल विदेशी ढक्कन लायेंगे,
स्वदेशी जुमला परायी पूंजी सजायेंगे।
‘दीपकबापू’ रुपया घर का ब्राह्मण
दावोस से डॉलर सिद्ध लायेंगे।
---
शहर में आग यूं ही नहीं लगी,
जरूर किसी में वोटों की भूख जगी।
‘दीपकबापू’ लोकतंत्र में अभिव्यक्ति 
खरीद कर पूंजी बनती उसकी सगी।
-

No comments:

समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका


लोकप्रिय पत्रिकायें

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर