Monday, December 9, 2013

भ्रष्टाचार मुक्त समाज की कल्पना-हिन्दी व्यंग्य कविता(bhrashtachar mukt samaj ki kalpana-hindi vyangya kavita)

भ्रष्टाचार मुक्त समाज की कल्पना
कितनी सुखद लगती है,
मगर इसके लिये जरूरी है कि
भगवान अवतार लेकर
स्वयं राजा बन जायें,
हम सारे सुख भोगते हुए
केवल उनका नाम गायें।
कहें दीपक बापू
हम बंदे इंसानों में देवता
क्यों तलाशते हैं,
यकीन कर लेते हैं
खूबसूरत चेहरों पर
स्वर्ग धरती पर लाने का वादा
करते हुए जो नाचते हैं,
कुछ लोग महापुरुष बनने के लिये
सतयुग जैसा वातावरण
लाने का का स्वांग रचते हैं,
आम आदमी  की भलाई काम हाथ में लिये
अपनी सारी समस्याओं से बचते हैं,
हम सुनकर उनकी बातें
कभी अपने दिल में न ले जायें।
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लेखक एवं संपादक-दीपक राज कुकरेजा भारतदीप

लश्कर, ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://dpkraj.blgospot.com

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