Thursday, May 5, 2016

मशहूरी का खेल-हिन्दी कविता(Play of Popularty-Hindi Poem)

अपना दिल साफ नहीं
परायों पर बदनीयती का
इल्जाम लगाते।

योग्यता के अभाव में
भला काम होता नहीं
ज़माने में कसूर जताते।

कहें दीपकबापू मशहूरी के
खेल में जीतने वाले गरियाते
हारने वाले भी
कभी नहीं पछताते।
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लेखक एवं संपादक-दीपक राज कुकरेजा भारतदीप
लश्करग्वालियर (मध्य प्रदेश)
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak 'Bharatdeep',Gwalior
http://dpkraj.blgospot.com


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