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Tuesday, October 21, 2008

मुफ्त में जुर्म सहती जाना-हास्य कविता

सास ने बहू से कहा
'तुम्हें आज मायके जाने की अनुमति
पर शाम ढलने से पहले घर लौट आना
तेरे ससुर और पति से तेरे जाने की
ख़बर छुपाये रखूँगी
उनके आने से पहले नहीं आई
तो दोनों नाराज होंगे
पडेगा तुम्हें पछताना
हाँ, मेरे लिए कोई तोहफा
जरूर लाना'
बहू बिचारी शाम से पहले वापस आयी
साथ में सास के लिए साड़ी भी लाई
पर सास को साड़ी पसंद नही आयी
और जोर से किया चिल्लाना शुरू
'कैसे कंगाल घर की हैं
इतनी सस्ती साड़ी लाई
ज़रा भी शर्म नहीं आयी
पता नहीं कौनसे मुहूर्त में
इसका रिश्ता अपने बेटे के लिए माना'

बेटा और पति के घर लौटने तक
उसने मचा रखा कोहराम
नहीं करने दिया बहु को आराम
घर में उनके घुसते उसने
उनको दी शिकायत
बहु को कोसने में नहीं की किफायत
ससुर ने बहु से कहा
'बेटी नए जमाने की हो
पर बदला नहीं है ज़माना
तुमने अभी सास-बहु के
रिश्ते को नहीं जाना
कभी तुम सास को खुश नहीं कर सकती
चाहे लाख जतन कर लो
इसलिए कभी सास के लिए कुछ नहीं लाना
अपने पिता का खर्चा करा कर भी झेलने से
तो अच्छा है मुफ्त में सास के जुर्म सहती जाना'
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Tuesday, September 4, 2007

बुद्धिजीवियों का झगडा और आम आदमी

ऐक बुद्धिजीवी ने दूसरे से कहा
'मेरी बात सुनो '
दूसरे ने कहा
'पहले मेरी बात सुनो'
दोनों में तू तू -मैं मैं हो गयी शुरू
बहस इस बात पर लंबी चली कि
पहले कौन बोले और कौन है इसके लायक
कौन है चेला कौन है गुरू

चारों तरफ लग गयी भीड़
ऐक आम आदमी उनके पास आया
और उसने झगड़ा सुलझाया
जिसने पहले प्रस्ताव दिया है
वही करे पहले कहना शुरू
पहले ने कहा
'अब पहले मैं नही कहूंगा
जो यह कहेगा वही सुनुँगा'
दूसरे ने भी पलटा खाया और बोला
'अब यह बोलेगा मैं सुनूँगा
यह पहले मेरी सुनकर
अपनी बात गढ़ लेगा
इस मामले में है गुरू'
फिर हो गया शुरू

आम आदमी ने पूछा
' दोनों पहले यह बताओ
आपकी बुद्धि में क्या भरा है
इतिहास, भूगोल या अर्थशास्त्र'
दोनो ऐक स्वर में बोले
'झगड़ा शास्त्र'
और फिर उस पर अपना
ज्ञान बघारना किया शुरू
वह भागने लगा तो उसे पकड लिया
और ऐक बोला
'यह झगडा तो तुम्हें फंसाने के लिए था
अब पूरा ज्ञान सुनकर जाओ गुरू '
दूसरे ने कहा
'मैं कर रहा हूँ झगड़े पर उपाधि लेने का प्रयास
यही दिलवायेंगे
गुरू दक्षिणा में माँगा था ऐक श्रोता
नही दिल्वाता तो मैं रोता
मैं हूँ चेला यह ठहरे गुरू'
डरा सहमा आदमी कुछ देर तो सुनता रहा
फिर झटका देकर अपना हाथ छुड़ाया
और नहीं रुका जो किया भागना शुरू
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