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Saturday, May 2, 2009

आदमी का दिल कहार नहीं बन सकता-हिन्दी शायरी (admi ka dil kahar nahin hai-hindi shayri)

जिंदगी के इस सफ़र में
बिछडे साथियों का पता
किससे पूछें
सभी ढूंढ रहे हैं
अपने यार जो खो गए.

मगर फिर भी पूछते हैं
क्योंकि बात से बात निकलते ही
वही हमारे यार हो गये.

हर आदमी का दिल कहार नहीं बन सकता
जो यादों की डोली लाद कर चलता रहे
बिछडों की याद में हाथ मलता रहे
हमदर्दी लेकर दर्द बाटने वाले
जो लोग मिले, वही दिलदार हो गए..

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Sunday, February 1, 2009

इस खबर से सनसनी नहीं फैलेगी-हास्य व्यंग्य

अपने बास के आदेश पर टीवी कैमरामैन और संवाददाता कि सनसनीखेज खबर को ढूंढने लगे। वह अपनी कार में बैठे सड़कों पर इधर उधर घूम रहे थे। अचानक उन्होंने देखा कि एक आदमी पैदल चलते हुए सड़क पर बने एक गड़ढे में गिर गया। संवाददाता ने कार चालक को कार रोकने का इशारा किया और कैमरामैन से कहा-‘‘जल्दी उतरो। वह आदमी गड़ढे में गिर गया है।’’
कैमरामैने ने कहा-‘अरे सर! आप भूल रहे हो कि हमारा काम खबरें देना हैं न कि लोगों की मदद करना। कम से कम किसी गिरे को उठाने का काम तो हमारा बिल्कुल नहीं है।’
संवाददाता ने कहा-‘अरे, बीच सड़क पर गड्ढा बन गया है। उसमें आदमी गिर गया है। इस खबर से सनसनी फैल सकती है और नहीं फैलेगी तो गड्ढे की बदौलत हम उसे बना लेंगे। आदमी की मदद के लिये थोड़ी ही हम लोग चल रहे हैं।’
दोनों उतर पड़े। मगर तब तक वह आदमी वहां से उठ खड़ा हुआ और अपनी राह चलने लगा। संवाददाता उसके पास पहुंच गया और बोला-‘अरे, आप भी कमाल करते हैं। सड़क पर बने गड्ढे में गिर पड़े और बिना हल्ला मचाये चले जा रहे हैं। जरा रुकिये!’
उस आदमी ने कहा-‘भाई साहब, मुझे जल्दी जाना है। उधार वाले पीछे पड़े रहते हैं। अच्छा हुआ जल्दी उठ गया वरना अधिक देर लगाता तो हो सकता है कि यहां से कोई लेनदार गुजरता तो तकादा करने लग जाता।’
संवाददाता ने कहा-‘उसकी चिंता आप मत करिये। हम समाचार दिखाने वाले लोग हैं। किसी की हिम्मत नहीं है कि कोई हमारे कैमरे के सामने आपसे कर्जा मांग सके। आप वैसे ही इस गड्ढे में दोबारा गिर कर दिखाईये तो हम आपका फोटो टीवी पर दिखायेंगे। इससे गड्ढे के साथ आपका भी प्रचार होगा। आप देखना कल ही यह गड्ढा भर जायेगा।’
उस आदमी ने कहा-‘तो आप गड्ढे का ही फोटो खीच लीजिये न! कल अगर मेरा चेहरा लेनदारों को दिख गया तो उनको पता चलेगा कि मैं इसी शहर में हूं। अभी तो वह घर पर जाते हैं तो परिवार के सदस्य कह देते हैं कि बाहर गया है।’
संवाददाता ने कहा-‘कल तुम यहां की प्रसिद्ध हस्ती हो जाओगे किसी की हिम्मत नहीं है कि तुमसे कर्जा मांग सके। हो सकता है कि इतने प्रसिद्ध हो जाओ कि फिल्मों मेंं तुम्हें गड़ढे में गिरने वाले दृश्यों के लिये स्थाई अभिनेता मान लिया जाये।’
वह आदमी प्रसन्न हो गया। उसने गड्ढे में गिरने का अभिनय किया और इससे उसकी हथेली पहले से अधिक घिसट गयी और खरौंच के निशान बन गये। संवाददाता ने कैमरामैन को इशारा किया। इससे पहले वह फोटो खींचता कि संवाददाता का मोबाइल बज गया। उसने मोबाइल पर बात की और उसे तत्काल जेब में रखते हुए कैमरामैन से बोला-‘इसे छोड़ो। उधर एक सनसनीखेज खबर मिल गयी है। सर्वशक्तिमान की दरबार के बाहर एक चूहा मरा पाया गया है। अभी तक वहां कोई भी दृश्य समाचार टीम नहीं पहुंची है। इस खबर से सनसनी फैल सकती है।’

कैमरामैन ने- जो कि फोटो खींचने की तैयारी कर रहा था- संवाददाता के आदेश पर अपना कैमरा बंद कर दिया। संवाददाता और कैमरामैन दोनों वहां से चल दिये। पीछे से उस आदमी ने कहा-‘अरे, मरे चूहे से क्या सनसनी फैलेगी। तुम इस गड्ढे को देखो और फिर मेरी तरफ? मेरा हाथ छिल गया है? कितनी चोट लगी है।’
संवाददाता ने कहा-‘यह गड्ढा सड़क के एकदम किनारे है और तुम इधर उधर यह देखते हुए चल रहे थे कि कोई लेनदार देख तो नहीं रहा और गिर गये। इसलिये इस खबर से सनसनी नहीं फैलेगी। फिर पहले तो तुमको चोट नहीं आयी। टीवी पर दिखने की लालच पर तुम दूसरी बार गिरे। यह पोल भी कोई दृश्य समाचार देने वाला खोल सकता है। अब हमारे पास एक सनसनी खेज खबर आ गयी है इसलिये जोखिम उठाना बेकार है।
वह दोनों चले गये तो वह आदमी फिर उठकर खड़ा हुआ। यह दृश्य उसको रोज अखबार देने वाला हाकर देख रहा था। वह उसके पास आया और बोला-‘साहब, आप भी किसके चक्कर में पड़े गये और खालीपीली हाथ छिलवा बैठे।’
उस आदमी ने कहा-‘तुम अखबार में समाचार भी देते हो न! जाकर यह खबर दे देा कि दृश्य समाचार वालों के चक्कर में मेरी यह हालत हुई है। हो सकता है इससे प्रचार मिल जाये दूसरे दृश्य समाचार वाले मेरे से साक्षात्कार लेने आ जायें।’
हाकर ने कहा-‘साहब! मैं छोटा आदमी हूं। इन दृश्य समाचार वालों से बैर नहीं ले सकता। क्या पता कब अखबार की ऐजेंसी बंद हो जाये और हमें छोटे मोटे काम के लिये इनके यहां नौकरी के लिये जाना पड़े।’
वह आदमी अपने छिले हुए हाथ को देखता हुआ रुंआसे भाव से चला गया।
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Wednesday, August 6, 2008

जिन्दगी चलते है ऐसे ही-हिन्दी शायरी

जीवन के उतार चढाव के साथ
चलता हुआ आदमी
कभी बेबस तो कभी दबंग हो जाता
सब कुछ जानने का भ्रम
उसमें जब जा जाता तब
अपने आपसे दूर हो जाता आदमी

दुख पहाड़ लगते
सुख लगता सिंहासन
खुली आँखों से देखता जीवन
मन की उथल-पुथल के साथ
उठता-बैठता
पर जीवन का सच समझ नहीं पाता
जब अपने से हटा लेता अपनी नजर तब
अपने आप से दूर हो जाता आदमी

मेलों में तलाशता अमन
सर्वशक्तिमान के द्वार पर
ढूँढता दिल के लिए अमन
दौलत के ढेर पर
सवारी करता शौहरत के शेर पर
अपने इर्द-गिर्द ढूँढता वफादार
अपने विश्वास का महल खडा करता
उन लोगों के सहारे
जिनका कोई नहीं होता आधार तब
अपने आपसे दूर हो जाता आदमी

जमीन से ऊपर अपने को देखता
अपनी असलियत से मुहँ फेरता
लाचार के लिए जिसके मन में दर्द नहीं
किसी को धोखा देने में कोई हर्ज नहीं
अपने काम के लिए किसी भी
राह पर चलने को तैयार होता है तब
अपने आपसे दूर हो जाता आदमी
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