Showing posts with label chirag. Show all posts
Showing posts with label chirag. Show all posts

Thursday, April 23, 2009

रौशनी का वास्ता कब तक दिलाओगे-हिंदी शायरी (roshni ka vasata-hindi shayri)

तख्तियों पर लिखे शीर्षकों के तले
खड़े लोगों की भीड़ को
कब तक बहलाओगे।
इंसान की आदतों को
कब तक भीड़ में छिपाओगे।
टकराते हैं जब लोगों मे मतलब आपस में
तब जंग भी होती है
इंसान अपने लिये जागता है
पर भीड़ तो हमेशा सोती है
लोगों की भीड़ में ढूंढते हो
आदमी-औरत, गरीब-अमीर
और शोषक-शोषित
बांटकर उनको
तरक्की के रास्ते पहुंचाने का
दिखावा कब तब कर पाओगे।
बरसों से यही हाल है
जो आज दिख रहा है
जमाने ने देखा है तुम्हारा दौर भी
जब तुूम्हारे हाथ में था अलादीन का चिराग
तब भी तुमने कोई जादू नहीं किया
इस बात पर करना जरूरी है गौर भी
वादे करना और कसमें खाना
तुम्हारी पुरानी आदत है
पर जमाने को कब तक
खाली भरोसे पर बहलाओगे
अंधेरे में गुजारते हुए बरसों हो गये
खाली चिराग सजाकर
कब तब रौशनी का वास्ता दिलाओगे।

....................................

यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिकालेखक संपादक-दीपक भारतदीप

समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका


लोकप्रिय पत्रिकायें

विशिष्ट पत्रिकाऐं

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर