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Wednesday, February 9, 2011

रंग बदलती दुनियां-हिन्दी व्यंग्य शायरी (rang badalti duniya-hindi vyangya shayari)

सामानों के पीछे दौड़ते रहे
मगर सब जेब से महंगे हो गये,
जिन लोगों की नीयत पर शक नहंी था
वह सस्ते बिक कर नंगे हो गये।
कमबख्त,
इस रंग बदलती दुनियां के
नज़ारे कुछ हमने ऐसे देखे कि
जिसे चाहा अपना हुआ नहीं,
अपना होकर भी गैर बनकर साथ रहा यहीं,
स्वच्छ छवि
सम्मानीय व्यक्तित्व का स्वामी
और सफेद ख्याल का जिसे माना
वही डालर, पौंड और दीनार की खातिर
कोयले की दलाली करते
काले रंग से रंगे हो गये।
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कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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Sunday, August 17, 2008

चाणक्य नीति:पास और परे होने का सम्बन्ध हृदय से है

1.राजा, अग्नि, गुरु, स्त्री इनसे निकटता खतरनाक होती है। इनसे थोड़ा परे रहकर संपर्क रखना चाहिए। अग्नि, जल, सर्प, मूर्ख, और राजा कभी भी रुष्ट होने पर मनुष्य के प्राण तक ले सकते हैं।
2.सच्चा ज्ञानी तो वही है जो प्रसंग के अनुसार वार्तालाप में अपने तर्क उचित ढंग से प्रस्तुत करता है। वह अनुकूल होने पर प्रेम करता है और अपनी शक्ति के अनुसार क्रोध प्रदर्शन करने वाला भी होता है।
3.हृदय में रहने वाला दूर रहकर भी पास है और हृदय में न रहने वाला पास रहकर भी दूर रहता है। परे और निकट के संबंध का आधार हृदय के भाव से है।
4.जल में तेल पड़ते ही कम होने के बावजूद तेल का विस्तार हो जाता है। उसी तरह दुष्ट के साथ गोपनीय विषय पर की गयी वार्ता विद्युत गति से फैल जाती है। उसी तरह सुदान की चर्चा भी विस्तार पाती है। विस्तार की शक्ति अपने पात्र के कार्य करने पर निर्भर रहती है।
5.निर्धन को पत्नी, मित्र, सेवक, भाई और परिजन सब छोड़ देते हैं।

दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति
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